भारत में Dragon Fruit Farming (ड्रैगन फ्रूट की खेती) पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार पाने वाली व्यावसायिक बागवानी फसलों में शामिल हो गई है। इसे भारत में कमलम (Kamalam) के नाम से भी जाना जाता है। गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक इसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कई अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार हो रहा है। ICAR के अनुसार भारत में ड्रैगन फ्रूट का क्षेत्र लगभग 14.51 हजार हेक्टेयर और उत्पादन करीब 53.72 हजार मीट्रिक टन बताया गया है।
इस फसल की खासियत बारहमासी उत्पादन, अपेक्षाकृत कम पानी में खेती की संभावना और बढ़ती घरेलू मांग है। लेकिन इसे “बिना जोखिम वाली फसल” मानना सही नहीं होगा। गर्मी में sunburn, जलभराव, खराब planting material, support structure की लागत और बाजार भाव इसकी व्यावसायिक सफलता को प्रभावित कर सकते हैं। ICAR-IIHR ने गर्म क्षेत्रों में sunburn को महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए climate-resilient management technologies विकसित की हैं।

Dragon Fruit Farming : (ड्रैगन फ्रूट)
ड्रैगन फ्रूट एक उच्च-मूल्य फल फसल है, जिसे एक बार स्थापित करने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है। इसके फल का बाजार पारंपरिक फलों से अलग एक premium segment बनाता है।
इसके अलावा इसकी खेती में drip irrigation, fertigation, support system और pruning जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बाग का व्यवस्थित प्रबंधन किया जा सकता है।
हालांकि किसानों को केवल “प्रति किलो ऊंचा भाव” देखकर इसकी खेती शुरू नहीं करनी चाहिए। स्थापना लागत, बाजार की दूरी, फल की गुणवत्ता और बिक्री का वास्तविक भाव पहले समझना जरूरी है।
भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती किन राज्यों में हो रही है?
ICAR के अनुसार गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के प्रमुख dragon fruit producing states हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी इसका तेजी से विस्तार हुआ है। उत्तर-पूर्वी भारत में त्रिपुरा, मिजोरम और नागालैंड में commercial cultivation शुरू होने की जानकारी भी ICAR ने दी है।
राज्यवार संभावनाएं
| राज्य/क्षेत्र | खेती की स्थिति | प्रमुख अवसर/चुनौती |
| गुजरात | प्रमुख उत्पादक | गर्मी में heat management |
| महाराष्ट्र | प्रमुख क्षेत्र | गर्मी और sunburn |
| कर्नाटक | प्रमुख क्षेत्र | व्यावसायिक बाजार |
| तेलंगाना | तेजी से विस्तार | गर्मी प्रबंधन |
| आंध्र प्रदेश | विस्तार | सिंचाई व बाजार |
| तमिलनाडु | विस्तार | गर्मी/जल प्रबंधन |
| पश्चिम बंगाल | खेती का विस्तार | अधिक नमी/बारिश |
| त्रिपुरा | commercial cultivation | उच्च वर्षा |
| मिजोरम | commercial cultivation | पहाड़ी भूभाग |
| नागालैंड | commercial cultivation | भू-आकृति और बाजार |
| राजस्थान | कुछ क्षेत्रों में अपनाया गया | अत्यधिक गर्मी/सिंचाई |
| हिमाचल/J&K | कुछ उपयुक्त क्षेत्रों में संभावना | ठंड/पाला जोखिम |
कौन-से राज्य Dragon Fruit Farming के लिए सबसे अनुकूल हैं?
ड्रैगन फ्रूट tropical और subtropical परिस्थितियों में अच्छी तरह विकसित हो सकता है। ICAR के अनुसार लगभग 25–40°C गर्मियों का तापमान और लगभग 6–20°C सर्दियों का तापमान उपयुक्त range के रूप में बताया गया है। वर्षा वाले क्षेत्रों में 500 से 2,500 mm तक का उल्लेख मिलता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पानी खेत में खड़ा नहीं होना चाहिए।
इसलिए केवल राज्य के नाम से यह तय नहीं किया जा सकता कि वहां पूरी तरह उपयुक्त परिस्थितियां हैं। उसी राज्य के एक जिले में खेती सफल हो सकती है और दूसरे में जलभराव या अत्यधिक गर्मी के कारण जोखिम बढ़ सकता है।
सबसे अनुकूल परिस्थितियों की पहचान
- गर्म से उपोष्ण जलवायु
- पर्याप्त धूप
- अच्छी drainage
- हल्की से मध्यम, जैविक पदार्थ वाली मिट्टी
- लगभग pH 5.0–7.0
- अत्यधिक पाले से बचाव
- लंबे समय तक 40°C से ऊपर तापमान न हो
- मजबूत support structure लगाने की सुविधा
ICAR के अनुसार waterlogged lowland dragon fruit के लिए उपयुक्त नहीं है।
1 एकड़ में Dragon Fruit Farming का पूरा खर्च कितना हो सकता है?
एक एकड़ की लागत को दो भागों में समझना ज्यादा सही है:
(1) स्थापना लागत — पौधे, support structure, drip, खेत की तैयारी आदि।
(2) वार्षिक रखरखाव लागत — खाद, सिंचाई, pruning, मजदूरी, plant protection, harvesting और marketing।
2025 की MIDH Operational Guidelines में Dragon Fruit with support system के लिए ₹6.75 लाख/हेक्टेयर cost norm निर्धारित है। सामान्य क्षेत्रों में इस cost norm पर 40% सहायता, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक pro-rata आधार पर, निर्धारित शर्तों के अनुसार दी जा सकती है। NE & Himalayan States, Scheduled Areas आदि निर्दिष्ट क्षेत्रों में सहायता 50% तक हो सकती है।
एक हेक्टेयर 2.471 एकड़ के बराबर होता है। इसलिए केवल गणितीय रूपांतरण से ₹6.75 लाख/हेक्टेयर का cost norm लगभग ₹2.73 लाख/एकड़ बैठता है। लेकिन इसे किसान की वास्तविक बाजार लागत या निश्चित subsidy नहीं माना जाना चाहिए।
1 एकड़ का व्यावहारिक बजट मॉडल
| खर्च का मद | अनुमान/भूमिका |
| भूमि तैयारी | स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर |
| Dragon fruit cuttings/plants | variety व nursery पर निर्भर |
| RCC/metal support system | प्रमुख स्थापना खर्च |
| Trellis/ऊपरी support | structure design पर निर्भर |
| Drip irrigation | पानी और खेत के layout पर निर्भर |
| Organic manure/compost | soil test के अनुसार |
| Labour | क्षेत्र और management पर निर्भर |
| Mulching | वैकल्पिक/क्षेत्र आधारित |
| Plant protection | मौसम व रोग के अनुसार |
| Harvesting & grading | उत्पादन के साथ बढ़ता खर्च |
| Packaging/transport | बाजार दूरी के अनुसार |
महत्वपूर्ण: वास्तविक project cost स्थानीय quotation के बिना निश्चित नहीं की जानी चाहिए।
क्या 1 एकड़ में ₹6–10 लाख खर्च होना संभव है?
हां, यदि किसान premium support system, उच्च गुणवत्ता वाले planting material, बेहतर drip/fertigation, fencing, land development, water source, shade management और अन्य infrastructure लगाता है तो वास्तविक investment सरकारी cost norm से अधिक भी हो सकता है।
दूसरी ओर किसान के पास पहले से सिंचाई, fencing और कुछ infrastructure उपलब्ध हो तो अतिरिक्त निवेश कम हो सकता है।
इसलिए “Dragon Fruit Farming Cost per Acre” के लिए एक ही आंकड़ा सभी किसानों पर लागू नहीं होता।
क्या 1 एकड़ में Dragon Fruit Farming से लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं?
संभावना है, लेकिन इसे guaranteed income नहीं माना जाना चाहिए।
ICAR की एक farmer innovation report में एक किसान के यहां 10–12 kg प्रति पौधा औसत उत्पादन और ₹80–₹100/kg के prevailing market rate का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में mature plants से cuttings बेचकर अतिरिक्त आय की संभावना भी बताई गई है। हालांकि ICAR ने इस innovation की economic viability, productivity और structure durability के लिए आगे scientific validation की आवश्यकता भी दर्ज की है।
एक अन्य ICAR case study में कर्नाटक के एक किसान ने 2 एकड़ में 4,000 plants लगाए और अलग-अलग वर्षों में आय बढ़ने का अनुभव दर्ज किया गया। यह एक farmer case study है, इसे सभी किसानों के लिए सामान्य उत्पादन या profit benchmark नहीं समझना चाहिए।
1 एकड़ का संभावित Profit Model कैसे बनाएं?
किसान को इस सूत्र से अपना वास्तविक business model बनाना चाहिए:
कुल आय = बिकने योग्य फल × वास्तविक औसत बिक्री मूल्य
और:
शुद्ध लाभ = कुल आय – वार्षिक लागत – स्थापना लागत का वार्षिकीकृत हिस्सा
उदाहरण के लिए यदि किसी बाग में 10,000 kg marketable fruit निकलता है और औसत realized price ₹80/kg है, तो gross revenue ₹8 लाख होगा।
लेकिन यदि वास्तविक बिक्री मूल्य ₹50/kg रह जाए तो वही उत्पादन ₹5 लाख revenue देगा।
यही कारण है कि dragon fruit farming में yield से अधिक महत्वपूर्ण “realized price + marketable yield” है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती में Support System क्यों जरूरी है?
व्यावसायिक उत्पादन के लिए मजबूत support system अत्यंत महत्वपूर्ण है। पौधे की शाखाएं support के ऊपर फैलती हैं और वहीं से flowering तथा fruiting का व्यवस्थित management किया जाता है।
MIDH guidelines में भी Dragon Fruit को support system सहित अलग component के रूप में रखा गया है।
Support structure की quality पर बचत करने से बाद में पौधों के भार और तेज हवा के समय नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
Dragon Fruit Farming में सबसे महत्वपूर्ण सावधानी क्या है?
भारत के गर्म क्षेत्रों में sunburn एक प्रमुख चुनौती बनकर सामने आई है। ICAR-IIHR के अनुसार 36–40°C या उससे अधिक तापमान की स्थितियों में पौधों पर heat stress और sunburn बढ़ सकता है।
ICAR-IIHR ने किसानों के खेतों में kaolin-based bio-stimulant spray technology का प्रदर्शन किया है। संस्थान के अनुसार इससे sunburn damage में 40–60% तक कमी, fruit set में 20–30% सुधार और yield में 30–50% तक वृद्धि के farmer-reported results मिले हैं।
वहीं ICAR-NIASM ने 50% black/white shade net artificial shading technology विकसित की है। इसके demonstrations में canopy temperature 5–6°C कम होने और sunburn incidence में 90% से अधिक कमी जैसी observations दर्ज की गईं।
ये आंकड़े specific technology demonstrations से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें हर खेत में मिलने वाला निश्चित परिणाम नहीं मानना चाहिए।
ड्रैगन फ्रूट के लिए पानी और मिट्टी कैसी होनी चाहिए?
ड्रैगन फ्रूट में अच्छी drainage अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिट्टी में लगातार पानी जमा रहने पर collar और roots के आसपास सड़न की समस्या हो सकती है।
ICAR के अनुसार sandy loam से loam soil और लगभग pH 5.0–7.0 की मिट्टी उपयुक्त मानी गई है।
व्यावहारिक मॉडल
Soil test → organic matter सुधार → raised/managed drainage → drip irrigation → आवश्यकता आधारित fertigation
इस फसल में “कम पानी” का मतलब कम सिंचाई नहीं बल्कि efficient irrigation समझना चाहिए।
Dragon Fruit में planting material कैसे चुनें?
गुणवत्तापूर्ण और disease-free planting material commercial orchard की सफलता की पहली शर्तों में से एक है।
ICAR ने disease spread को रोकने के लिए विश्वसनीय nursery और स्वस्थ mother plants से planting material लेने पर जोर दिया है। लगभग 20–30 cm के स्वस्थ stem cuttings से nursery plants तैयार किए जा सकते हैं।
किसान को जांचना चाहिए
- variety का स्पष्ट नाम
- mother plant की health
- रोग/कीट के लक्षण नहीं
- rooted plant की जड़ें स्वस्थ हों
- nursery की विश्वसनीयता
- बिल/record उपलब्ध हो
- एक ही बाग में अनिश्चित स्रोत के पौधे न मिलाएं
Dragon Fruit की कौन-सी किस्में लगाई जा सकती हैं?
भारत में red-fleshed selections को बाजार में अच्छी पहचान मिली है। ICAR ने Moroccan Red, Jumbo Red और Vietnam Red जैसी selections का उल्लेख किया है। इसके अलावा white-fleshed और yellow-skinned types भी उपलब्ध हैं।
लेकिन केवल “लाल फल” देखकर variety का चयन न करें। किसान को स्थानीय buyers से पहले यह पता करना चाहिए कि वे किस size, रंग, sweetness और quality का फल खरीदते हैं।
Dragon Fruit की खेती को किसानों के फायदे का सौदा कैसे बनाया जा सकता है?
1. पहले बाजार तय करें
फल मंडी, retailer, supermarket, hotel या direct consumer—किसे बेचेंगे, पहले तय करें।
2. Quality planting material लें
सस्ते पौधों के बजाय स्वस्थ पौधों को प्राथमिकता दें।
3. Support structure में समझौता न करें
तेज हवा और पौधों के भार को ध्यान में रखकर design करें।
4. Drip irrigation अपनाएं
पानी की बचत और controlled irrigation के लिए।
5. Heat management रखें
गर्म क्षेत्रों में sunburn management को business plan में शामिल करें।
6. Grading करें
एक ही भाव पर पूरा उत्पादन न बेचें।
7. Value addition पर विचार करें
Juice, pulp, dried fruit और अन्य processed products के लिए स्थानीय food-processing opportunities तलाशें।
8. Planting material से अतिरिक्त आय
स्वस्थ mature plants से नियमों और गुणवत्ता मानकों के अनुसार propagation material तैयार कर अतिरिक्त revenue stream विकसित की जा सकती है।
क्या Dragon Fruit Farming जैविक और प्राकृतिक खेती में संभव है?
ड्रैगन फ्रूट में organic manure, compost, mulching, microbial inputs और integrated pest management को शामिल किया जा सकता है। इससे chemical inputs को कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
लेकिन commercial organic certification के लिए निर्धारित standards का पालन आवश्यक होगा। केवल रासायनिक उर्वरक न डालने से farm produce स्वतः “certified organic” नहीं कहलाता।
ड्रैगन फ्रूट की खेती में कौन-कौन से जोखिम हैं?
| जोखिम | संभावित प्रभाव | समाधान की दिशा |
| अत्यधिक गर्मी | Sunburn | shade/heat management |
| जलभराव | Root/stem rot | drainage |
| खराब पौधे | कम survival | certified/reliable nursery |
| तेज हवा | Structure damage | मजबूत support |
| कम बाजार भाव | Profit कम | advance marketing |
| रोग/कीट | Yield loss | IPM |
| बहुत अधिक planting | Oversupply risk | market assessment |
| खराब grading | कम price | sorting/packing |
| पानी की कमी | Growth/yield प्रभावित | drip + water planning |
| अचानक मौसम | Flower/fruit नुकसान | climate monitoring |
भारत में Dragon Fruit Farming का भविष्य कैसा है?
भारत में इस फसल की सबसे बड़ी संभावना high-value horticulture, domestic consumption, value addition और climate-smart farming के बीच है।
ICAR के 2025 के आंकड़ों में भारत के लिए dragon fruit का क्षेत्र लगभग 14.51 हजार हेक्टेयर और उत्पादन लगभग 53.72 हजार MT बताया गया है तथा क्षेत्र को 50,000 हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना का उल्लेख है।
लेकिन बढ़ता क्षेत्र अपने साथ एक नया सवाल भी लाएगा—क्या उत्पादन बढ़ने के साथ बाजार भी उसी गति से बढ़ेगा?
इसलिए भविष्य में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। Cold chain, grading, processing, export, branding और farmer-producer organizations की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
1 एकड़ Dragon Fruit Farming — संपूर्ण Business Plan
| चरण | काम | मुख्य लक्ष्य |
| 1 | Soil & water testing | उपयुक्तता जांच |
| 2 | Market survey | buyer तय करना |
| 3 | Variety selection | बाजार के अनुसार |
| 4 | Quality plants | survival rate |
| 5 | Support system | मजबूत structure |
| 6 | Drip installation | efficient irrigation |
| 7 | Plantation | व्यवस्थित spacing |
| 8 | Training/pruning | canopy management |
| 9 | Flower/fruit care | quality production |
| 10 | Sunburn management | heat protection |
| 11 | Harvesting | सही maturity |
| 12 | Grading | premium pricing |
| 13 | Direct marketing | बेहतर realization |
| 14 | Value addition | अतिरिक्त revenue |
Summary (निष्कर्ष)
Dragon Fruit Farming : (ड्रैगन फ्रूट) भारत में एक संभावनाशील high-value horticulture crop है। गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक इसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में हैं, जबकि देश के अनेक अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार हो रहा है।
एक एकड़ में इसकी खेती की लागत कोई एक निश्चित राशि नहीं है। Planting material + support structure + irrigation + land development + labour + management के आधार पर निवेश बदलता है। 2025 MIDH guidelines का ₹6.75 लाख/हेक्टेयर cost norm एक सरकारी reference है, न कि हर किसान की वास्तविक लागत।
इस खेती को फायदे का व्यवसाय बनाने के लिए किसान को “पौधे लगाने” के बजाय “पूरा value chain” देखना होगा—अच्छी variety, स्वस्थ पौधे, मजबूत structure, drip irrigation, गर्मी से सुरक्षा, grading और पहले से तय बाजार।
विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे गर्म क्षेत्रों में sunburn management अब खेती की योजना का अनिवार्य हिस्सा माना जाना चाहिए। ICAR की नई technologies इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।
FAQs – 7 महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
1. 1 एकड़ में Dragon Fruit Farming शुरू करने में कितना खर्च आता है?
लागत planting material, support system, drip, भूमि तैयारी और infrastructure पर निर्भर करती है। MIDH 2025 में dragon fruit with support system का cost norm ₹6.75 लाख/हेक्टेयर है, लेकिन इसे वास्तविक किसान लागत नहीं माना जाना चाहिए।
2. क्या 1 एकड़ Dragon Fruit Farming से लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं?
हां, संभावना है, लेकिन आय yield और वास्तविक बिक्री मूल्य पर निर्भर करती है। ICAR की farmer case studies में अच्छी आय के उदाहरण हैं, लेकिन उन्हें हर खेत के लिए guaranteed return नहीं माना जा सकता।
3. भारत में Dragon Fruit की खेती सबसे अधिक किन राज्यों में होती है?
गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार हो रहा है।
4. क्या Dragon Fruit को कम पानी में उगाया जा सकता है?
यह अपेक्षाकृत water-efficient crop है, लेकिन irrigation की जरूरत होती है। drip irrigation और अच्छी drainage इसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
5. Dragon Fruit में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
गर्म क्षेत्रों में sunburn/heat stress महत्वपूर्ण चुनौती है। जलभराव, stem rot, खराब planting material और बाजार भाव भी जोखिम हैं।
6. क्या सरकार Dragon Fruit Farming पर subsidy देती है?
MIDH 2025 guidelines में dragon fruit with support system के लिए ₹6.75 लाख/हेक्टेयर cost norm और सामान्य क्षेत्रों में 40% assistance का प्रावधान है, निर्धारित शर्तों के अनुसार। वास्तविक लाभ राज्य की implementation, पात्रता और उपलब्ध बजट पर निर्भर करेगा।
7. Dragon Fruit Farming के लिए कौन-सी मिट्टी और जलवायु सबसे अच्छी है?
अच्छी drainage वाली sandy-loam से loam मिट्टी, लगभग pH 5–7 और गर्म से subtropical climate उपयुक्त मानी जाती है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी, पाला और जलभराव से बचना जरूरी है।
References / संदर्भ सूची
- ICAR – Indian Council of Agricultural Research: Dragon fruit cultivation, Indian production और agro-climatic requirements.
- ICAR–IIHR: Climate-resilient sunburn mitigation technology for dragon fruit.
- ICAR–NIASM: Artificial shading technology for dragon fruit sunburn management.
- National Horticulture Board – MIDH Operational Guidelines 2025: Dragon fruit with support system के cost norms और assistance pattern.
- ICAR Annual Report 2022–23: कर्नाटक के किसान द्वारा dragon fruit cultivation का documented case study.
- ICAR – VKSA Farmer-led Innovations: Dragon fruit cultivation में yield, income और planting material से अतिरिक्त आय का farmer innovation example.
- ICAR–Indian Farming, August 2025: Dragon Fruit Cultivation: A Potential Crop for North Eastern Hill Region.
Disclaimer
यह लेख किसानों और कृषि पाठकों के लिए शैक्षिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। Dragon fruit की वास्तविक लागत, पौध संख्या, yield, बाजार मूल्य और profit क्षेत्र, variety, planting material, मौसम, प्रबंधन तथा बिक्री चैनल के अनुसार काफी बदल सकते हैं।
MIDH में दिए गए ₹6.75 लाख/हेक्टेयर cost norm और सहायता प्रतिशत को निश्चित subsidy राशि न समझें। योजना का वास्तविक लाभ राज्य की वर्तमान guidelines, पात्रता, verification, स्वीकृति और उपलब्ध बजट पर निर्भर करता है।
व्यावसायिक बाग लगाने से पहले किसान को संबंधित जिला उद्यानिकी विभाग, KVK, कृषि विश्वविद्यालय या ICAR संस्थान से स्थानीय मिट्टी, जलवायु, variety, spacing, plant protection और सरकारी सहायता की वर्तमान जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
विशेष रूप से 1 एकड़ में बड़ा निवेश करने से पहले स्थानीय खरीदारों से वास्तविक खरीद मूल्य और मांग की पुष्टि करना जरूरी है।








