Dragon Fruit Farming in India : (भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती) — जलवायु, किस्में, पौध तैयार करने से लेकर बाजार, लागत और मुनाफे तक की पूरी जानकारी

भारत में Dragon Fruit Farming in India (भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती) पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार पाने वाली उच्च-मूल्य बागवानी गतिविधियों में शामिल हो गई है। इसे भारत में कमलम (Kamalam) नाम से भी जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह कैक्टस वर्ग का फलदार पौधा है और अपेक्षाकृत कम पानी वाले क्षेत्रों में भी उत्पादन की संभावना रखता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सूखे या गर्म क्षेत्र में बिना अतिरिक्त प्रबंधन के इसकी खेती सफल होगी। ICAR के अनुसार भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विशेष रूप से विकसित हुई है तथा अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल सहित अनेक राज्यों में इसका विस्तार हुआ है। उत्तर-पूर्वी राज्यों और हिमालयी क्षेत्रों में भी इसकी संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। 2025 की MIDH Operational Guidelines में Dragon fruit with support system के लिए ₹6.75 लाख/हेक्टेयर का cost norm और सामान्य क्षेत्रों में 40% सहायता का प्रावधान दिया गया है, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक pro-rata आधार पर, जबकि कुछ विशेष क्षेत्रों में सहायता 50% तक है। वास्तविक सहायता राज्य की कार्यान्वयन व्यवस्था और पात्रता पर निर्भर करेगी। Dragon Fruit Farming in India : (भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती) ड्रैगन फ्रूट एक बारहमासी फलदार पौधा है, जिसकी शाखाएं वास्तव में रसीले हरे तने होती हैं। पौधे को सामान्यतः मजबूत support system पर चढ़ाकर विकसित किया जाता है। भारत में इसकी खेती बढ़ने के पीछे कई कारण हैं—फल की बाजार मांग, स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में इसकी लोकप्रियता, विभिन्न agro-climatic क्षेत्रों में इसकी अनुकूलन क्षमता और बाग लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन लेने की संभावना। ICAR के 2025 के लेख के अनुसार भारत में इसकी खेती का विस्तार तेजी से हुआ है और देश के अनेक राज्यों में इसे अपनाया जा चुका है। भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती कहां-कहां होती है? भारत में इसका प्रमुख व्यावसायिक विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुआ है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी बड़े पैमाने पर खेती की संभावनाएं और विस्तार दिखाई दे रहा है। ICAR ने उत्तर-पूर्व में त्रिपुरा, मिजोरम और नागालैंड में भी commercial cultivation शुरू होने का उल्लेख किया है। ICAR-IIHR के अनुसार वर्तमान में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में खेती को विशेष रूप से महत्व मिला है। साथ ही गर्मियों में sunburn को इन क्षेत्रों में प्रमुख उत्पादन चुनौती माना गया है। भारत में प्रमुख क्षेत्र — एक नजर में क्षेत्र/राज्य स्थिति/संभावना गुजरात प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र महाराष्ट्र प्रमुख उत्पादक क्षेत्र कर्नाटक प्रमुख विस्तार क्षेत्र आंध्र प्रदेश व्यावसायिक संभावना तेलंगाना गर्म क्षेत्र में व्यापक संभावना तमिलनाडु खेती का विस्तार पश्चिम बंगाल उत्पादन का विस्तार त्रिपुरा उत्तर-पूर्व में commercial cultivation मिजोरम commercial cultivation नागालैंड commercial cultivation हिमाचल प्रदेश/J&K कुछ उप-उष्ण क्षेत्रों में संभावनाएं दुनिया में ड्रैगन फ्रूट की खेती किन देशों में होती है? ICAR के अनुसार प्रमुख dragon fruit producing countries में Vietnam, China, Mexico, Colombia, Nicaragua, Ecuador, Thailand, Malaysia, Indonesia, Australia और United States शामिल हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में इसका व्यापार और उत्पादन विशेष रूप से विकसित है। भारत के लिए वैश्विक बाजार से सीखने का बड़ा क्षेत्र quality grading, variety selection, post-harvest management, packaging और export standards है। ड्रैगन फ्रूट की कितनी प्रमुख किस्में होती हैं? ड्रैगन फ्रूट में मुख्य अंतर फल की त्वचा और गूदे के रंग के आधार पर देखा जाता है। प्रकार बाहरी रंग गूदे का रंग सामान्य पहचान White-fleshed लाल/गुलाबी सफेद H. undatus Red-fleshed लाल लाल H. polyrhizus Purple-fleshed लाल गहरा बैंगनी/लाल H. costaricensis Yellow-skinned पीला सफेद H. megalanthus ICAR ने भारत में लोकप्रिय red-fleshed selections में Moroccan Red, Jumbo Red और Vietnam Red का उल्लेख किया है। किसान को केवल फल के रंग के आधार पर variety नहीं चुननी चाहिए। स्थानीय जलवायु, बाजार, फल का आकार, sweetness, shelf life और planting material की उपलब्धता को भी देखना चाहिए। ड्रैगन फ्रूट के लिए कैसी जलवायु और मिट्टी चाहिए? ड्रैगन फ्रूट गर्म से उष्ण जलवायु में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, लेकिन अत्यधिक तापमान इसकी productivity और fruit quality को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से गर्म क्षेत्रों में sunburn अब महत्वपूर्ण उत्पादन चुनौती बन रही है। ICAR-IIHR के शोध के अनुसार 36–40°C या उससे अधिक तापमान की स्थिति में पौधों के cladodes पर heat और solar radiation stress बढ़ सकता है। उपयुक्त परिस्थितियों की सामान्य रूपरेखा ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की जरूरत कैसी है? ड्रैगन फ्रूट को water-efficient crop के रूप में देखा जाता है, लेकिन कम पानी की जरूरत का अर्थ पानी की बिल्कुल जरूरत न होना नहीं है। पौधे के establishment, flowering और fruit development के दौरान पर्याप्त नमी आवश्यक है। दूसरी ओर लगातार जलभराव जड़ों और तनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए drip irrigation + good drainage व्यावसायिक बाग के लिए बेहतर संयोजन माना जाता है। Dragon Fruit Farming की step-by-step प्रक्रिया क्या है? 1. भूमि परीक्षण सबसे पहले soil testing कराएं। 2. जलनिकासी सुधारें ऐसे खेत से बचें जहां वर्षा का पानी लंबे समय तक रुकता हो। 3. स्वस्थ planting material लें सामान्यतः rooted stem cuttings का उपयोग किया जाता है। ICAR के लेख में लगभग 15–25 cm stem cuttings का उल्लेख है। 4. Support system तैयार करें ड्रैगन फ्रूट को मजबूत खंभे और ऊपर support की जरूरत होती है। 5. पौधे लगाएं स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/उद्यानिकी विशेषज्ञ की recommended spacing के अनुसार plantation करें। 6. Drip irrigation लगाएं पानी और fertigation को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। 7. Training और pruning करें पौधे की मुख्य शाखाओं को support पर प्रशिक्षित करें और अनावश्यक growth को नियंत्रित करें। 8. फूल और फल प्रबंधन Flowering stage में पोषण, irrigation और pest/disease monitoring बढ़ाएं। 9. Harvest और grading फल को सही maturity stage पर तोड़कर grade करें। Dragon Fruit Farming में Support System इतना महत्वपूर्ण क्यों है? यह फसल जमीन पर फैलने के बजाय मजबूत structure पर बेहतर ढंग से विकसित की जाती है। इसलिए commercial orchard में support system शुरुआती निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी कारण MIDH की 2025 guidelines में Dragon fruit को “with support system” के रूप में अलग cost norm … Continue reading Dragon Fruit Farming in India : (भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती) — जलवायु, किस्में, पौध तैयार करने से लेकर बाजार, लागत और मुनाफे तक की पूरी जानकारी